मुंबई लोकल ट्रेन में मुंबईकरों के आपसी सहयोग पर एक मजेदार किस्सा…

मुंबई लोकल ट्रेन में मुंबईकरों के आपसी सहयोग पर एक मजेदार किस्सा
पहली बार मुम्बई गये Ashok Kumar Gupta जी लोकल ट्रेन में चढै सहयात्रियों से पूछने लगा, ” मुलुंड कब आएगा ? मुझे उतरना है। “
सहयात्रियों ने बताया, ” भाई, ये गाड़ी दादर से ठाणे जा रही फास्ट लोकल है। मुलुंड से गुजरेगी मगर रुकेगी नहीं। “
Gupta जी घबरा गये।
सहयात्रियों ने समझाया, ” घबराओ नहीं।
 आजकल मुलुंड में ये ट्रेन रोज स्लो हो जाती है।
 तुम एक काम करो, मुलुंड में जैसे ही ट्रेन स्लो हो तो तुम दौड़ते हुए, प्लेटफॉर्म पर उतरना और फिर बिना रुके थोड़ी दूर तक, ट्रेन जिस दिशा में जा रही है, उसी दिशा में दौड़ते रहना। इससे तुम गिरोगे नहीं। “
मुलुंड आने से पहले सहयात्रियों ने Gupta ji  को गेट पर खड़े कर दिया। मुलुंड आते ही सिखाए अनुसार Gupta  जी प्लेटफार्म पर कूदे और कुछ अधिक ही तेजी से दौड़ गया।
इतना तेज दौड़ा कि अगले कोच तक जा पहुँचा। उस कोच के यात्रियों ने, किसी ने Gupta ji जी  का हाथ पकड़ा तो किसी ने, उसकी शर्ट पकड़ी और उसे खींचकर ट्रेन में चढ़ा लिया।
 ट्रेन फिर गति पकड़ चुकी थी। सहयात्री Gupta ji  जी से कहने लगे, ” भाई, तेरा नसीब अच्छा है जो, ये गाड़ी तुझे मिल गई। ये फास्ट ट्रेन है, मुलुंड में स्टॉपेज नहीं है, इसका। “