मेरी रूह का परिंदा फड़फड़ाये, लेकिन सकून का जजीरा मिल न पाए…

मेरी रूह का परिंदा फड़फड़ाये,
लेकिन सकून का जजीरा मिल न पाए
प्रश्न: इस कविता में, कवि कहाँ है और क्या कर रहा है?
उत्तर: इस कविता में कवि wine shop के बाहर खड़ा है और उसका नवरात्रि का व्रत है़.