वो आँगन की भुरभुरी सी सूखी मिट्टी…

*वो आँगन की*
*भुरभुरी सी सूखी मिट्टी..*
*वो फर्श पर पड़ी*
*धूल पे चंद पाँव के निशान..*
*वो अखबार के कुछ*
*फड़फड़ाते बिखरे पन्ने..*
*वो डाइनिंग टेबल पर पड़े*
*चाय के दो खाली प्यासे प्याले..*
*वो बिस्तर में पड़ा*
*मासूम गीला तौलिया..*
*वो इन्तज़ार करती*
*उल्टी भीगी छतरी..*
*वो खामोश दाल की काली पतीली..*
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सब *नौकरानी की छुट्टी* की निशानियां है !
(हमेशा *गुलज़ार की शायरी* नहीं होती)