खवाहिश नही मुझे मशहूर होने की….

*खवाहिश  नही  मुझे  मशहूर  होने  की*।
*आप  मुझे  पहचानते  हो  बस  इतना  ही  काफी  है*। 
 
*अच्छे  ने  अच्छा  और  बुरे  ने  बुरा  जाना  मुझे*।
*क्यों  कि  जिसकी  जितनी  जरुरत  थी  उसने  उतना  ही  पहचाना  मुझे*।
 
*ज़िन्दगी  का  फ़लसफ़ा  भी   कितना  अजीब  है*, 
*शामें  कटती  नहीं,  और  साल  गुज़रते  चले  जा  रहे  हैं*….!!
 
*एक  अजीब  सी  दौड़  है  ये  ज़िन्दगी*, 
*जीत  जाओ  तो  कई  अपने  पीछे  छूट  जाते  हैं*,
*और  हार  जाओ  तो  अपने  ही  पीछे  छोड़  जाते  हैं*।
 
*बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर*…
*क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है*..
 
*मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा*,
*चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना*।।
 
*ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है*
*पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है*
 
*जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि एक मुद्दत से मैंने*
*न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले* .!!.
 
*एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली*..
*वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे*..!!
 
*सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से*..
*पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला* !!!
 
*सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब*….
*बचपन वाला ‘इतवार’ अब नहीं आता*
 
*जीवन की भाग-दौड़ में*
*क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है* ?
*हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है*..
 
*एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम और* 
*आज कई बार बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है*..
 
*कितने दूर निकल गए*, 
*रिश्तो को निभाते निभाते*..
*खुद को खो दिया हमने, अपनों को पाते पाते*..
 
*लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है*,
*और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते*..
 
*खुश* *हूँ और* *सबको खुश* *रखता हूँ*,
*लापरवाह* *हूँ फिर भी सबकी परवाह*
*करता हूँ*..
 
*मालूम है कोई मोल नहीं मेरा, फिर भी*,
*कुछ अनमोल लोगो से रिश्ता रखता हूँ*…!